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FD कराने वालों के लिए बड़ा झटका! अब FD पर मिलेगा कम रिटर्न, जानें कितना देना होगा टैक्स – Tax On FD

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Tax On FD – भारत में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें मिलने वाला रिटर्न गारंटीड होता है और जोखिम नहीं रहता है। लेकिन क्या आपको पता है कि एफडी से होने वाली कमाई पर टैक्स भी लगता है। जी हां, अगर आपने बैंक में एफडी कराई है तो आपको उसके ब्याज पर टैक्स देना होगा। कई लोग इस बात से अनजान रहते हैं और बाद में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि एफडी पर कितना टैक्स लगता है, टीडीएस कैसे कटता है और इससे बचने के क्या उपाय हैं।

एफडी पर टैक्स कैसे लगता है

जब भी आप किसी बैंक या वित्तीय संस्था में फिक्स्ड डिपॉजिट कराते हैं, तो उस पर आपको एक तय ब्याज दर के अनुसार ब्याज मिलता है। हालांकि, यह ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री नहीं होता है। इनकम टैक्स नियमों के अनुसार, एफडी पर मिलने वाले ब्याज को आपकी कुल आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर कर लगाया जाता है।

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अगर किसी वित्तीय वर्ष में आपकी एफडी से मिलने वाला ब्याज 40,000 रुपये (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50,000 रुपये) से अधिक होता है, तो बैंक उस पर 10% टीडीएस (Tax Deducted at Source) काट लेता है। अगर आपने बैंक में अपना पैन नंबर अपडेट नहीं कराया है तो यह टीडीएस बढ़कर 20% तक हो सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपना पैन नंबर बैंक में अपडेट कराएं।

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एफडी पर टैक्स का कैलकुलेशन कैसे होता है

मान लीजिए कि आपने बैंक में 5 लाख रुपये की एफडी कराई है और आपको 7% की ब्याज दर मिल रही है। इसका मतलब है कि आपको सालभर में 35,000 रुपये का ब्याज मिलेगा। यह राशि 40,000 रुपये की सीमा से कम है, इसलिए इस पर टीडीएस नहीं कटेगा। लेकिन अगर आपकी एफडी का ब्याज 40,000 रुपये से अधिक होता है, तो बैंक 10% टीडीएस काट लेगा।

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अगर आप 30% टैक्स स्लैब में आते हैं, तो आपको अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आपके एफडी का ब्याज 50,000 रुपये है, तो बैंक 10% टीडीएस काटेगा यानी 5,000 रुपये। लेकिन चूंकि आप 30% स्लैब में आते हैं, इसलिए आपको 15,000 रुपये और टैक्स देना होगा।

क्या एफडी के अलावा कोई बेहतर विकल्प है

एफडी सुरक्षित निवेश विकल्प जरूर है, लेकिन टैक्स कटौती के बाद मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। इसलिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लानी चाहिए और अन्य बेहतर विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए। कुछ ऐसे निवेश विकल्प हैं जो एफडी से ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं:

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म्युचुअल फंड:

म्युचुअल फंड लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) पर 1.5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स छूट भी मिलती है।

पोस्ट ऑफिस एफडी:

पोस्ट ऑफिस में भी फिक्स्ड डिपॉजिट की सुविधा मिलती है, जिसमें ब्याज दर बैंक से बेहतर हो सकती है।

पीपीएफ (PPF):

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में निवेश करने पर टैक्स छूट मिलती है और ब्याज दर भी अच्छी होती है।

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एफडी पर टीडीएस से बचने के तरीके

  1. फॉर्म 15G/15H जमा करें: अगर आपकी कुल सालाना आय टैक्स योग्य सीमा से कम है तो आप बैंक में फॉर्म 15G (नॉन-सीनियर सिटिज़न) या 15H (सीनियर सिटिज़न) जमा कर सकते हैं। इससे बैंक आपके एफडी के ब्याज पर टीडीएस नहीं काटेगा।
  2. एफडी को अलग-अलग बैंकों में करें: अगर आपकी एफडी से मिलने वाला ब्याज 40,000 रुपये से अधिक हो रहा है, तो आप इसे अलग-अलग बैंकों में बांट सकते हैं, जिससे किसी एक बैंक में आपकी ब्याज आय 40,000 रुपये से कम रहे और टीडीएस न कटे।
  3. टैक्स सेविंग एफडी चुनें: कुछ बैंकों में 5 साल की लॉक-इन पीरियड वाली टैक्स सेविंग एफडी होती है, जिसमें निवेश करने पर 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है।

फिक्स्ड डिपॉजिट निवेश का एक सुरक्षित विकल्प जरूर है, लेकिन इससे होने वाली आय पर टैक्स भी देना पड़ता है। अगर आप एफडी में निवेश कर रहे हैं, तो आपको टीडीएस और टैक्स स्लैब का ध्यान रखना जरूरी है। इसके अलावा, अगर आप ज्यादा रिटर्न चाहते हैं तो म्युचुअल फंड और अन्य निवेश विकल्पों को भी अपनाना चाहिए। टैक्स बचाने के लिए फॉर्म 15G/15H भरें, अपने निवेश को अलग-अलग खातों में बांटें और सही रणनीति अपनाएं। इससे आपको ज्यादा फायदा मिलेगा और टैक्स का बोझ भी कम होगा।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। हम इसकी पूर्णता या सटीकता की गारंटी नहीं देते, कृपया आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

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